परिवेश के व्यवसाय(REET,MPTET)

परिवेश के व्यवसाय

  1. कपड़े सिलना
  2. बागवानी व कृषि कार्य
  3. पशुपालन
  4. मछलीपालन

 सिलाई के लिए आवश्यक साधन

  • वस्त्रों की सिलाई-कटाई का कार्य एक व्यवस्थित कार्य है।
  • इस कार्य को सफलतापवुक तथा सुविधापूर्वक करने के लिए विभिन्न उपकरणों एवं साधनों की आवश्यकता होती है।
  • सिलाई कार्य सम्बन्धी अधिकांश उपकरणों एवं सामग्री को सिलाई किट में एक साथ सम्भालकर रखा जाता है।
  • कुछ आवश्यक साधन सिलाई किट के अतिरिक्त भी होते हैं। दोनों ही वर्गों के साधनों एवं उपकरणों का विस्तृत विवरण निम्नवर्णित है

) सिलाई किट
सिलाई किट से तात्पर्य उस थैले अथवा डिब्बे से है जिसमें सिलाई से सम्बन्धित छोटा-मोटा आवश्यक सामान (यन्त्र एवं उपकरण) रखा जाता है। सिलाई किट सामान्य रूप से किसी मोटे कपड़े, रेक्सीन अथवा टाट से, थैले के आकार की बनाई जाती है। इसके अतिरिक्त लकड़ी, गत्ते अथवा लोहे के डिब्बे को भी सिलाई किट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। सिलाई किट में रखे जाने वाले सामान्य सामान निम्नलिखित हैं

(1) कैंचियाँ:
कपड़ा काटने के उपकरण को कैंची कहते हैं। वस्त्रों की सिलाई के लिए कपड़ा काटने के लिए छोटी व बड़ी कैंचियों की आवश्यकता पड़ती है। कैंचियों के उचित रख-रखाव के लिए माह में कम-से-कम एक बार इनके जोड़ों पर हल्का-सा तेल लगा देने से ये सदैव ठीक कार्य करती हैं। समय-समय पर कैंचियों में धार लगवानी भी आवश्यक होती हैं।

(2) सूइयाँ:
मशीन एवं हाथ से सिलाई करने के लिए विभिन्न प्रकार की सूइयाँ प्रयुक्त की जाती हैं। ये अनेक प्रकार की विभिन्न आकारों में उपलब्ध होती हैं। मशीन की सूई में नीचे व हाथ
की सूई में ऊपर की ओर धागे के लिए छिद्र होता है। लगभग सभी प्रकार की सुइयों का एक सेट सिलाई किट में रखना चाहिए।

(3) पिने:
पीतल की बनी ये पिने वस्त्र की सिलाई एवं कटाई के लिए बहुत उपयोगी हैं। लकड़ी के बोर्ड अथवा मेज पर कपड़ा फैलाकर ये पिनें लगाई जाती हैं, जिससे कि काटते समय कपड़ा इधर-उधर न खिसके।

(4) फिंगर कैप:
अंगुस्तान अथवा फिंगर कैप धातु अथवा प्लास्टिक का बना होता है। यह दाहिने हाथ की मध्यमा (बीच वाली अंगुली) के आकार का होता है तथा हाथ से सिलाई करते समय सूई की चुभन से सुरक्षा प्रदान करता है।

  1. अंगुस्ताना हैं।
  2. हाथ से सिलाई करते समय अंगुली मैं पहना जाने वाला उपकरण
  3. बखिया टांका लगाने का उपकरण
  4. मशीन की साफ सफाई करने हेतु प्रयुक्त उपकरण
  5. उक्त में से कोई नही

Ans a

 

(5) धागे:
सफेद एवं अन्य समस्त सामान्य रंगों के धागे सिलाई किट में सदैव उपलब्ध रहने चाहिए। कपड़े के रंग से मिलते-जुलते रंग के धागे का सिलाई में उपयोग किया जाता है। सिलाई के धागे मजबूत तथा पक्के रंग वाले ही होने चाहिए।

(6) नापने के लिए उपकरण या इंच टेप:
धातु अथवा कपड़े के बने इंच-टेप अथवा मीट्रिक टेप प्रयोग में लाए जाते हैं। वस्त्र की कटाई एवं सिलाई करते समय शारीरिक माप अथवा कपड़े को नापने के लिए इनका उपयोग किया जाता है।

Q .

(7)  कागज, रबर पेन्सिल:
बनाये जाने वाले वस्त्रों का आकार अथवा खाका तैयार करने के लिए कागज व पेन्सिल का उपयोग किया जाता है। रबर द्वारी आवश्यकतानुसार पेन्सिल के चिह्नों को मिटाया जा सकता है।

 (8) मोम मिल्टन चाक:
कुछ मोटे कपड़े व जीन सिलाई करते समय कट जाते हैं; अत: इससे बचने के लिए सिलाई के स्थानों पर मोम लगाई जाती है। । विभिन्न रंगों के आयताकार मिल्टन चॉकों को उपयोग कपड़ों की कटाई करते समय विभिन्न नापों अथवा आकारों को चिह्नित करने के लिए किया जाता है। मिल्टन चॉक द्वारा कपड़े पर लगाए गए निशान बिल्कुल साफ चमकते हैं। परन्तु ये पक्के नहीं होते। अत: सिलाई कार्य कर लेने के उपरान्त ब्रश से झाड़कर इन्हें साफ किया जा सकता है।

 

  1. MARKING WHEEL एक अनुरेखण पहिया , यह भी एक के रूप में जाना पैटर्न पहिया ,, और डार्ट पहिया , एक है साधन एक पहिया एक हैंडल से जुड़ी पर कई दांत के साथ। दांत या तो दाँतेदार या चिकने हो सकते हैं। यह ट्रेसिंग पेपर के उपयोग के साथ या बिना कपड़े पर सिलाई पैटर्न से चिह्नों को स्थानांतरित करने के लिए उपयोग किया जाता है|
  1. कपड़ो का नाप लेने के लिए प्रयुक्त किया जाता हैं

1 इंच टेप

2 टेलर चाक

3 अंगुस्ताना

4 मार्किंग व्हील

Ans a

  1. दर्जी द्वारा कपड़ो की कटाई करने के बाद चिन्ह लगाने हेतु प्रयुक्त उपकरण हैं।
  2. स्केल
  3. टेलर चाक
  4. अंगुस्ताना
  5. इंचटेप

Ans b

  1. सिलाई करते वक्त काम आने वाला उपकरण हैं।
  2. कागज, रबर पेन्सिल
  3. टेलर चाक
  4. अंगुस्ताना
  5. उपरोक्त सभी

Ans d

 

5.वस्त्रो पर एक साथ कई तहो पर निशान लगाने के लिए काम मे लिया जाता है।

  1. स्केल
  2. टेलर चाक
  3. मार्किंग व्हील
  4. इंच टेप

Ans c

 

  1. अंगुस्ताने का आकार केस होता हैं
  2. त्रिभुजाकार
  3. शंक्वाकार
  4. गोल
  5. टोपीनुमा

अनस d

 

() अन्य उपकरण:
वस्त्रों की कटाई एवं सिलाई के लिए कुछ ऐसे साधन एवं उपकरण भी आवश्यक होते हैं, जिन्हें सिलाई किट में नहीं रखा जातो परन्तु इस्तेमाल करना अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है। इस वर्ग के
साधनों एवं उपकरणों का सामान्य परिचय निम्नलिखित है

(1) सिलाई की मशीन:
यह सिलाई का सर्वाधिक उपयोगी उपकरण है। ये प्रायः दो प्रकार की होती हैं-हाथ से चलाने वाली तथा पैरों से चलाई जाने वाली। अब विद्युत चालित सिलाई मशीन भी बाजार में उपलब्ध है। सिलाई की मशीन के विभिन्न कल-पुर्जा का प्रारम्भिक ज्ञान प्राप्त करना सदैव लाभकारी रहता है। उपयोग में लाने के पश्चात् मशीन की सदैव सफाई करनी चाहिए तथा माह में कम-से-कम एक बार विभिन्न कल-पुर्जा की जड़ में तेल डालना चाहिए। इसके लिए मशीन में विभिन्न स्थानों पर छिद्र एवं चिह्न अंकित होते हैं।

(2) मिल्टन कपडा:
यह एक विशेष प्रकार का ऊनी कपड़ा होता है। इसका प्रयोग कपड़ों की कटाई करते समय मेज पर बिछाने के लिए होता है। इसकी लम्बाई व चौड़ाई मेज की लम्बाई-चौड़ाई के अनुसार होनी चाहिए।
3) मेज या पटरा:
प्रायः कपड़े को मेज पर फैलाकर खड़े होकर काटा जाता है। सिलाई की मेज प्राय: लकड़ी की बनी होती है। यह लगभग एक मीटर चौड़ी व डेढ़ मीटर लम्बी होती है। यदि सिलाई-कार्य भूमि पर बैठकर करना हो, तो मेज के स्थान पर एक लकड़ी का पटरा ही इस्तेमाल किया
जाता है।

(4) प्रेस या इस्तरी:
सिलाई क्रिया को सुचारु रूप से करने के लिए प्रेस या इस्तरी की भी आवश्यकता होती है। कपड़े की सलवटें निकालने तथा उसे सीधा करने के लिए प्रेस की आवश्यकता होती है। प्रेस दो प्रकार की हो सकती है विद्युत चालित, तथा कोयले से गर्म होने वाली।

 

 

हाथ की सिलाई के विभिन्न टाँके

हाथ की सिलाई के विभिन्न टॉकों का सामान्य परिचय निम्नलिखित है

  • कच्चा टाँका:
    कच्चे टाँके का प्रयोग कपड़े को अस्थायी रूप से जोड़ने के लिए किया जाता है। वास्तविक सिलाई कच्चे टाँके के बाद की जाती है। यह 1 सेमी लम्बा होता है। धागे में गाँठ देकर कपड़े को दायीं ओर से बायीं ओर सिला जाता है।

(2) सादा टाँका:
सादा या रनिंग टाँका हाथ की स्थायी सिलाई में अधिक प्रयोग किया जाता है। यह कच्चे टाँके की भाँति होता है, परन्तु उससे छोटा होता है।

(3) बखिया:
बखिया के टॉकों का प्रयोग कपड़ों की मजबूत और पक्की सिलाई करने के लिए। किया जाता

हाथ की बखिया सीधी और उल्टी होती है। तथा मशीन की बखिया से कहीं अधिक मजबूत होती है। कपड़ों के जोड़ पर मजबूत सिलाई करने के लिए बखिया के टॉकों की आवश्यकता होती है।

(4) तुरपाई या हैमिंग टाँका:
कपड़े के धागे निकलने से रोकने के लिए किनारे को बन्द करने के लिए इस टाँके का प्रयोग किया जाता है। इसमें सूई का समान रूप से छोटा टाँका लेकर कपड़े से निकालकर फिर दोहरे मोड़े हुए कपड़े में से निकालते हैं। तुरपन हाथ से ही की जाती है। इससे टाँके दूर से स्पष्ट नहीं दिखाई देते।

 

7.यदि आपके पास सिलाई मशीन उपस्थित नही हैं ,ऐसी परिस्थिति मैं किस प्रकार के टांके लगाए जा सकते हैं।

  1. तुरपाई टंका
  2. बखिया टांका
  3. सादा टांका
  4. कच्चा टांका

Ans b

  1. सिलाई की मशीन का सर्वप्रथम कहाँ और कब आविष्कार हुआ?
    उत्तर:
    फ्रांस में एक दर्जी ने सन् 1830 में साधारण सिलाई की मशीन का आविष्कार किया।

.9.भारत में सर्वप्रथम कौन-सी सिलाई मशीन का कारखाना स्थापित हुआ?
उत्तर:
भारत में सर्वप्रथम सन् 1935 में ऊषा मशीन का कारखाना स्थापित हुआ।

 

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You cannot copy content of this page